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Q: .
  • A. झूठा सच
  • B. तमस
  • C. जिन्दगीनामा
  • D. मानस का हंस
Correct Answer: Option D - ‘मनुष्य का मन है भैया, जब कभी भटक जाता है तो रो पड़ता है’। उक्त कथन अमृतलाल नागर कृत ‘मानस का हंस’ (1927 ई.) उपन्यास का है। यह उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र-पंडित आत्माराम, भैरोसिंह, पंडाइन, हुलसिया, पण्डित गणपति उपाध्याय, रामू द्विवेदी, बकरीदी कक्का, राजा, श्यामो की बुआ, पार्वती इत्यादि। अमृतलाल नागर के उपन्यास- महाकाल, सेठ बांकेलाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नुपूर, अमृत और विष, सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा आदि। भीष्म साहनी के उपन्यास- बसंती, तमस, कुन्तो, नीलू नीलिमा नीलोफर, झरोखे, कडि़याँ। यशपाल के प्रमुख उपन्यास- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, झूठा सच, अप्सरा का शाप, क्यों फंसे, तेरी मेरी उसकी बात आदि। फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ के प्रमुख उपन्यास- मैला आँचल, परती परिकथा, जुलूस, दीर्घतपा, कितने चौराहे, कलंक मुक्ति, पलटू बाबू रोड़ आदि। कृष्णा सोबती के प्रमुख उपन्यास- सूरजमुखी अँधरें के, जिन्दगी नामा, दिलोदानिश, समय सरगम आदि।
D. ‘मनुष्य का मन है भैया, जब कभी भटक जाता है तो रो पड़ता है’। उक्त कथन अमृतलाल नागर कृत ‘मानस का हंस’ (1927 ई.) उपन्यास का है। यह उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र-पंडित आत्माराम, भैरोसिंह, पंडाइन, हुलसिया, पण्डित गणपति उपाध्याय, रामू द्विवेदी, बकरीदी कक्का, राजा, श्यामो की बुआ, पार्वती इत्यादि। अमृतलाल नागर के उपन्यास- महाकाल, सेठ बांकेलाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नुपूर, अमृत और विष, सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा आदि। भीष्म साहनी के उपन्यास- बसंती, तमस, कुन्तो, नीलू नीलिमा नीलोफर, झरोखे, कडि़याँ। यशपाल के प्रमुख उपन्यास- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, झूठा सच, अप्सरा का शाप, क्यों फंसे, तेरी मेरी उसकी बात आदि। फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ के प्रमुख उपन्यास- मैला आँचल, परती परिकथा, जुलूस, दीर्घतपा, कितने चौराहे, कलंक मुक्ति, पलटू बाबू रोड़ आदि। कृष्णा सोबती के प्रमुख उपन्यास- सूरजमुखी अँधरें के, जिन्दगी नामा, दिलोदानिश, समय सरगम आदि।

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‘मनुष्य का मन है भैया, जब कभी भटक जाता है तो रो पड़ता है’। उक्त कथन अमृतलाल नागर कृत ‘मानस का हंस’ (1927 ई.) उपन्यास का है। यह उपन्यास गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर लिखा गया है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र-पंडित आत्माराम, भैरोसिंह, पंडाइन, हुलसिया, पण्डित गणपति उपाध्याय, रामू द्विवेदी, बकरीदी कक्का, राजा, श्यामो की बुआ, पार्वती इत्यादि। अमृतलाल नागर के उपन्यास- महाकाल, सेठ बांकेलाल, बूँद और समुद्र, शतरंज के मोहरे, सुहाग के नुपूर, अमृत और विष, सात घूँघट वाला मुखड़ा, एकदा नैमिषारण्ये, मानस का हंस, नाच्यौ बहुत गोपाल, खंजन नयन, बिखरे तिनके, अग्निगर्भा आदि। भीष्म साहनी के उपन्यास- बसंती, तमस, कुन्तो, नीलू नीलिमा नीलोफर, झरोखे, कडि़याँ। यशपाल के प्रमुख उपन्यास- दादा कामरेड, देशद्रोही, दिव्या, पार्टी कामरेड, झूठा सच, अप्सरा का शाप, क्यों फंसे, तेरी मेरी उसकी बात आदि। फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ के प्रमुख उपन्यास- मैला आँचल, परती परिकथा, जुलूस, दीर्घतपा, कितने चौराहे, कलंक मुक्ति, पलटू बाबू रोड़ आदि। कृष्णा सोबती के प्रमुख उपन्यास- सूरजमुखी अँधरें के, जिन्दगी नामा, दिलोदानिश, समय सरगम आदि।