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Q: .
  • A. चन्द्रगुप्त II
  • B. इनमें से कोई नहीं
  • C. श्रीगुप्त
  • D. समुद्रगुप्त
Correct Answer: Option A - चन्द्रगुप्त II (375 ई.-415 ई.) के दरबार में बहुत से विद्वानों को नवरत्न के रूप में अलंकृत किया गया था। नवरत्नों में सम्मिलित विद्वान-धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, घटकर्पर, कालिदास, वेतालभट्ट, वररुचि और वाराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के दरबार में थे। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।
A. चन्द्रगुप्त II (375 ई.-415 ई.) के दरबार में बहुत से विद्वानों को नवरत्न के रूप में अलंकृत किया गया था। नवरत्नों में सम्मिलित विद्वान-धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, घटकर्पर, कालिदास, वेतालभट्ट, वररुचि और वाराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के दरबार में थे। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।

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चन्द्रगुप्त II (375 ई.-415 ई.) के दरबार में बहुत से विद्वानों को नवरत्न के रूप में अलंकृत किया गया था। नवरत्नों में सम्मिलित विद्वान-धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, घटकर्पर, कालिदास, वेतालभट्ट, वररुचि और वाराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के दरबार में थे। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।