Correct Answer:
Option A - दिये गये विकल्पों में केवल (A), (B), (D), कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के संदर्भ में सत्य है। जो निम्न है-
1. सूर को भावाधिपति और सूर्य के प्रेम को जीवनोत्सव कहा था।
2. मानलीला और दानलीला को आनन्दोल्लास का विधान कहा था।
3. ज्ञान के साथ भावना का भी विकास होता है।
4. सूरदास ने बिना आँखों के जितना बारीक वर्णन किया, उतना कोई दूसरा कवि नहीं कर सका।
5. सूर का संयोग वर्णन एक क्षणिक घटना नहीं है, प्रेम-संगीतमय जीवन की एक गहरी चलती धारा है। जिसमें अवगाहन करने वाले को दिव्य माधुर्य के अतिरिक्त और कुछ नहीं दिखाई पड़ता।
A. दिये गये विकल्पों में केवल (A), (B), (D), कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के संदर्भ में सत्य है। जो निम्न है-
1. सूर को भावाधिपति और सूर्य के प्रेम को जीवनोत्सव कहा था।
2. मानलीला और दानलीला को आनन्दोल्लास का विधान कहा था।
3. ज्ञान के साथ भावना का भी विकास होता है।
4. सूरदास ने बिना आँखों के जितना बारीक वर्णन किया, उतना कोई दूसरा कवि नहीं कर सका।
5. सूर का संयोग वर्णन एक क्षणिक घटना नहीं है, प्रेम-संगीतमय जीवन की एक गहरी चलती धारा है। जिसमें अवगाहन करने वाले को दिव्य माधुर्य के अतिरिक्त और कुछ नहीं दिखाई पड़ता।