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  • A. केवल B, C तथा D
  • B. केवल A, C तथा D
  • C. केवल A, E तथा D
  • D. केवल A, B तथा C
Correct Answer: Option B - भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों के सन्दर्भ में सही कथन हैं - • आचार्य कुन्तक ने रीति रचना के तीन मार्ग माने है- सुकुमार, विचित्र और मध्यम। • भट्टनायक ने निष्पत्ति का अर्थ ‘मुक्ति’ और संयोग का अर्थ भोज्य-भोजक संबंध माना। • ध्वनि के तीन भेद माने गए हैं - वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि, रस ध्वनि। भारतीय काव्यशास्त्र के छह प्रमुख संप्रदाय और उनके आचार्य इस प्रकार हैं - सम्प्रदाय - आचार्य रस सम्प्रदाय - भरतमुनि अलंकार सम्प्रदाय - भामह रीति सम्प्रदाय - वामन वक्रोक्ति सम्प्रदाय - कुन्तक ध्वनि सम्प्रदाय - आनन्द वर्धन औचित्य सम्प्रदाय - क्षेमेन्द्र
B. भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों के सन्दर्भ में सही कथन हैं - • आचार्य कुन्तक ने रीति रचना के तीन मार्ग माने है- सुकुमार, विचित्र और मध्यम। • भट्टनायक ने निष्पत्ति का अर्थ ‘मुक्ति’ और संयोग का अर्थ भोज्य-भोजक संबंध माना। • ध्वनि के तीन भेद माने गए हैं - वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि, रस ध्वनि। भारतीय काव्यशास्त्र के छह प्रमुख संप्रदाय और उनके आचार्य इस प्रकार हैं - सम्प्रदाय - आचार्य रस सम्प्रदाय - भरतमुनि अलंकार सम्प्रदाय - भामह रीति सम्प्रदाय - वामन वक्रोक्ति सम्प्रदाय - कुन्तक ध्वनि सम्प्रदाय - आनन्द वर्धन औचित्य सम्प्रदाय - क्षेमेन्द्र

Explanations:

भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सम्प्रदायों के सन्दर्भ में सही कथन हैं - • आचार्य कुन्तक ने रीति रचना के तीन मार्ग माने है- सुकुमार, विचित्र और मध्यम। • भट्टनायक ने निष्पत्ति का अर्थ ‘मुक्ति’ और संयोग का अर्थ भोज्य-भोजक संबंध माना। • ध्वनि के तीन भेद माने गए हैं - वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि, रस ध्वनि। भारतीय काव्यशास्त्र के छह प्रमुख संप्रदाय और उनके आचार्य इस प्रकार हैं - सम्प्रदाय - आचार्य रस सम्प्रदाय - भरतमुनि अलंकार सम्प्रदाय - भामह रीति सम्प्रदाय - वामन वक्रोक्ति सम्प्रदाय - कुन्तक ध्वनि सम्प्रदाय - आनन्द वर्धन औचित्य सम्प्रदाय - क्षेमेन्द्र