Correct Answer:
Option A - प्रतापनारायण मिश्र के निबन्ध ‘शिवमूर्ति’ से सम्बन्धित पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
⦁ उनके साथ जिस प्रकार का जितना सम्बन्ध हम रख सकें उतना ही हमारा मन बुद्धि शरीर संसार परमारथ के लिए मंगल है।
⦁ मूर्ति बहुधा पाषाण की होती है जिसका प्रयोजन यह है कि उनसे हमारा दृढ़ सम्बन्ध है।
प्रतापनारायण मिश्र कृत निबन्ध ‘शिवमूर्ति’ भारतेन्दु युग का प्रतिनिधि गद्य रूप है। इस निबन्ध के माध्यम से लेखक देशवासियों को भाईचारे व विश्वबन्धुत्व का पाठ पढ़ाना चाहते हैं। प्रतापनारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का ‘एडिसन’ कहा है। इनके द्वारा लिखित प्रमुख निबन्ध निम्नांकित हैं-धोखा, दाँत, बालक, वृद्ध, आप, बात, खुशामद, भौं, नारी, मनोयोग, मुच्छ, परीक्षा, ह,द, होली है अथवा होरी इत्यादि।
A. प्रतापनारायण मिश्र के निबन्ध ‘शिवमूर्ति’ से सम्बन्धित पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं-
⦁ उनके साथ जिस प्रकार का जितना सम्बन्ध हम रख सकें उतना ही हमारा मन बुद्धि शरीर संसार परमारथ के लिए मंगल है।
⦁ मूर्ति बहुधा पाषाण की होती है जिसका प्रयोजन यह है कि उनसे हमारा दृढ़ सम्बन्ध है।
प्रतापनारायण मिश्र कृत निबन्ध ‘शिवमूर्ति’ भारतेन्दु युग का प्रतिनिधि गद्य रूप है। इस निबन्ध के माध्यम से लेखक देशवासियों को भाईचारे व विश्वबन्धुत्व का पाठ पढ़ाना चाहते हैं। प्रतापनारायण मिश्र को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी का ‘एडिसन’ कहा है। इनके द्वारा लिखित प्रमुख निबन्ध निम्नांकित हैं-धोखा, दाँत, बालक, वृद्ध, आप, बात, खुशामद, भौं, नारी, मनोयोग, मुच्छ, परीक्षा, ह,द, होली है अथवा होरी इत्यादि।