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Q: .
  • A. केवल (A), (C)
  • B. केवल (D), (E)
  • C. केवल (A), (B)
  • D. केवल (C), (D)
Correct Answer: Option A - ‘‘बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी, पानी भरेंगे लोग, और कुछ न कहेगी।’’ यह कथन जनवादी नाटककार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के नाटक ‘बकरी’ के पहले अंक (पहला दृश्य) से उद्धृत है। बकरी नाटक में दो अंक है और प्रत्येक अंक में 3 दृश्य हैं। इसमें आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है। यह एक व्यंग्य नाटक है, जो 1974 में प्रकाशित हुआ। ⇒ ‘‘दो आदमी जितना ज्यादा साथ रहे, एक हवा में सॉस ले, उतना ही ज्यादा अपने को एक दूसरे से अजनबी महसूस करे।’’ यह कथन आधुनिक भावबोध के नाटककार मोहन राकेश के नाटक ‘आधे-अधूरे’ से उद्धृत है। यह कथन बड़ी लड़की का है। यह नाटक 1969 में धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह नाटक स्त्री-पुरूष सम्बन्ध और दाम्पत्य संबन्ध के खोखलेपन तथा पारिवारिक विघटन की जीवन स्थितियों को दर्शाने वाला नाटक है। आधे-अधूरे नाटक के पात्र- महेन्द्रनाथ (काले सूट वाला आदमी), सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री (महेन्द्रनाथ की पत्नी), बिन्नी (बड़ी लड़की), किन्नी (छोटी लड़की), अशोक (लड़का)। ⇒ ‘‘निस्सन्देह! अनन्तदेवी के इंगित पर कुमारगुप्त नाच रहे है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक स्कंदगुप्त के प्रथम अंक में मातृगुप्त का है। यह नाटक 1928 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 5 अंक हैं। प्रसाद ने इस नाटक में भारत तथा यूरोप दोनों की नाट्य कलाओं का समावेश किया है। इस ऐतिहासिक नाटक में राजनीतिक घटनाओं के साथ-साथ पारिवारिक घटनाएँ भी जीवन को प्रभावित करती है। इस नाटक में पुरुष पात्रों को सद्मार्ग दिखाने का कार्य स्त्री पात्र करती है। इस दृष्टि से इस नाटक में स्त्री पात्रों का विशेष महत्व है। स्कन्दगुप्त नाटक के पात्र- पुरुष पात्र- स्कन्दगुप्त, कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बंधुवर्मा, भीमवर्मा, मातृगुप्त, प्रपंचबुद्धि, सर्वनाग, कुमारदास (धातुसेन), परगुप्त, भट्टार्क, पृथ्वीसेन, सिंगल, मुद्गल, प्रख्यातकीर्ति। नारीपात्र- देवकी, अनंतदेवी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी। ⇒ ‘‘सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ के द्वितीय अंक में ‘शकराज’ का है। यह 1933 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कुल 3 अंक है तथा प्रत्येक अंक में एक दृश्य है। इसमें स्त्री पात्रों के सशक्तीकरण का भी चित्रण मिलता है। ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्र:- पुरुष पात्र:- चन्द्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित शकराज, खिंगल, मिहिरदेव। नारीपात्र:- ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा। ⇒ ‘‘सुना है, उनके भतीजे असदुल्लाह की शादी हो गयी।’’ उक्त कथन हबीब तनवीर के नाटक ‘आगरा बाजार’ के पात्र ‘शायर’ का है। इस नाटक की रचना हबीब तनवीर ने 18वीं सदी के भारतीय शायर एवं नज्म के पिता कहे जाने वाले नजीर अकबरावादी को प्रतिष्ठित करने के लिए किया है। यह दो अंकों में विभक्त है। इस नाटक का सर्वप्रथम मंचन 14 मार्च 1954 को ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ के कला विभाग के खुले मंच पर किया गया था।
A. ‘‘बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी, पानी भरेंगे लोग, और कुछ न कहेगी।’’ यह कथन जनवादी नाटककार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के नाटक ‘बकरी’ के पहले अंक (पहला दृश्य) से उद्धृत है। बकरी नाटक में दो अंक है और प्रत्येक अंक में 3 दृश्य हैं। इसमें आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है। यह एक व्यंग्य नाटक है, जो 1974 में प्रकाशित हुआ। ⇒ ‘‘दो आदमी जितना ज्यादा साथ रहे, एक हवा में सॉस ले, उतना ही ज्यादा अपने को एक दूसरे से अजनबी महसूस करे।’’ यह कथन आधुनिक भावबोध के नाटककार मोहन राकेश के नाटक ‘आधे-अधूरे’ से उद्धृत है। यह कथन बड़ी लड़की का है। यह नाटक 1969 में धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह नाटक स्त्री-पुरूष सम्बन्ध और दाम्पत्य संबन्ध के खोखलेपन तथा पारिवारिक विघटन की जीवन स्थितियों को दर्शाने वाला नाटक है। आधे-अधूरे नाटक के पात्र- महेन्द्रनाथ (काले सूट वाला आदमी), सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री (महेन्द्रनाथ की पत्नी), बिन्नी (बड़ी लड़की), किन्नी (छोटी लड़की), अशोक (लड़का)। ⇒ ‘‘निस्सन्देह! अनन्तदेवी के इंगित पर कुमारगुप्त नाच रहे है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक स्कंदगुप्त के प्रथम अंक में मातृगुप्त का है। यह नाटक 1928 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 5 अंक हैं। प्रसाद ने इस नाटक में भारत तथा यूरोप दोनों की नाट्य कलाओं का समावेश किया है। इस ऐतिहासिक नाटक में राजनीतिक घटनाओं के साथ-साथ पारिवारिक घटनाएँ भी जीवन को प्रभावित करती है। इस नाटक में पुरुष पात्रों को सद्मार्ग दिखाने का कार्य स्त्री पात्र करती है। इस दृष्टि से इस नाटक में स्त्री पात्रों का विशेष महत्व है। स्कन्दगुप्त नाटक के पात्र- पुरुष पात्र- स्कन्दगुप्त, कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बंधुवर्मा, भीमवर्मा, मातृगुप्त, प्रपंचबुद्धि, सर्वनाग, कुमारदास (धातुसेन), परगुप्त, भट्टार्क, पृथ्वीसेन, सिंगल, मुद्गल, प्रख्यातकीर्ति। नारीपात्र- देवकी, अनंतदेवी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी। ⇒ ‘‘सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ के द्वितीय अंक में ‘शकराज’ का है। यह 1933 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कुल 3 अंक है तथा प्रत्येक अंक में एक दृश्य है। इसमें स्त्री पात्रों के सशक्तीकरण का भी चित्रण मिलता है। ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्र:- पुरुष पात्र:- चन्द्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित शकराज, खिंगल, मिहिरदेव। नारीपात्र:- ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा। ⇒ ‘‘सुना है, उनके भतीजे असदुल्लाह की शादी हो गयी।’’ उक्त कथन हबीब तनवीर के नाटक ‘आगरा बाजार’ के पात्र ‘शायर’ का है। इस नाटक की रचना हबीब तनवीर ने 18वीं सदी के भारतीय शायर एवं नज्म के पिता कहे जाने वाले नजीर अकबरावादी को प्रतिष्ठित करने के लिए किया है। यह दो अंकों में विभक्त है। इस नाटक का सर्वप्रथम मंचन 14 मार्च 1954 को ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ के कला विभाग के खुले मंच पर किया गया था।

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‘‘बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी, पानी भरेंगे लोग, और कुछ न कहेगी।’’ यह कथन जनवादी नाटककार सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के नाटक ‘बकरी’ के पहले अंक (पहला दृश्य) से उद्धृत है। बकरी नाटक में दो अंक है और प्रत्येक अंक में 3 दृश्य हैं। इसमें आधुनिक राजनीतिक भ्रष्टाचार तथा नेताओं द्वारा गांधी के विचारों की बार-बार की जा रही हत्या का चित्रण है। यह एक व्यंग्य नाटक है, जो 1974 में प्रकाशित हुआ। ⇒ ‘‘दो आदमी जितना ज्यादा साथ रहे, एक हवा में सॉस ले, उतना ही ज्यादा अपने को एक दूसरे से अजनबी महसूस करे।’’ यह कथन आधुनिक भावबोध के नाटककार मोहन राकेश के नाटक ‘आधे-अधूरे’ से उद्धृत है। यह कथन बड़ी लड़की का है। यह नाटक 1969 में धर्मयुग पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह नाटक स्त्री-पुरूष सम्बन्ध और दाम्पत्य संबन्ध के खोखलेपन तथा पारिवारिक विघटन की जीवन स्थितियों को दर्शाने वाला नाटक है। आधे-अधूरे नाटक के पात्र- महेन्द्रनाथ (काले सूट वाला आदमी), सिंघानिया, जगमोहन, जुनेजा, सावित्री (महेन्द्रनाथ की पत्नी), बिन्नी (बड़ी लड़की), किन्नी (छोटी लड़की), अशोक (लड़का)। ⇒ ‘‘निस्सन्देह! अनन्तदेवी के इंगित पर कुमारगुप्त नाच रहे है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक स्कंदगुप्त के प्रथम अंक में मातृगुप्त का है। यह नाटक 1928 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 5 अंक हैं। प्रसाद ने इस नाटक में भारत तथा यूरोप दोनों की नाट्य कलाओं का समावेश किया है। इस ऐतिहासिक नाटक में राजनीतिक घटनाओं के साथ-साथ पारिवारिक घटनाएँ भी जीवन को प्रभावित करती है। इस नाटक में पुरुष पात्रों को सद्मार्ग दिखाने का कार्य स्त्री पात्र करती है। इस दृष्टि से इस नाटक में स्त्री पात्रों का विशेष महत्व है। स्कन्दगुप्त नाटक के पात्र- पुरुष पात्र- स्कन्दगुप्त, कुमारगुप्त, गोविन्दगुप्त, पर्णदत्त, चक्रपालित, बंधुवर्मा, भीमवर्मा, मातृगुप्त, प्रपंचबुद्धि, सर्वनाग, कुमारदास (धातुसेन), परगुप्त, भट्टार्क, पृथ्वीसेन, सिंगल, मुद्गल, प्रख्यातकीर्ति। नारीपात्र- देवकी, अनंतदेवी, जयमाला, देवसेना, विजया, कमला, रामा, मालिनी। ⇒ ‘‘सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम है।’’ यह कथन जयशंकर प्रसाद के नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ के द्वितीय अंक में ‘शकराज’ का है। यह 1933 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कुल 3 अंक है तथा प्रत्येक अंक में एक दृश्य है। इसमें स्त्री पात्रों के सशक्तीकरण का भी चित्रण मिलता है। ध्रुवस्वामिनी नाटक के पात्र:- पुरुष पात्र:- चन्द्रगुप्त, रामगुप्त, शिखरस्वामी, पुरोहित शकराज, खिंगल, मिहिरदेव। नारीपात्र:- ध्रुवस्वामिनी, मंदाकिनी, कोमा। ⇒ ‘‘सुना है, उनके भतीजे असदुल्लाह की शादी हो गयी।’’ उक्त कथन हबीब तनवीर के नाटक ‘आगरा बाजार’ के पात्र ‘शायर’ का है। इस नाटक की रचना हबीब तनवीर ने 18वीं सदी के भारतीय शायर एवं नज्म के पिता कहे जाने वाले नजीर अकबरावादी को प्रतिष्ठित करने के लिए किया है। यह दो अंकों में विभक्त है। इस नाटक का सर्वप्रथम मंचन 14 मार्च 1954 को ‘जामिया मिलिया इस्लामिया’ के कला विभाग के खुले मंच पर किया गया था।