Correct Answer:
Option C - ‘युधिष्ठिर’ अलुक् तत्पुरुष समास है। जिस समास में विभक्ति का लोप न हो अलुक् तत्पुरुष समास होता है। युधिष्ठिर का अर्थ युद्ध में स्थिर। जिस समास के पहले पद में निषेधार्थक अ या अन् शब्द का प्रयोग होता है, उसे ‘नञ समास’ कहते हैं। जैसे – अनश्व, अनुचित, अगति, अनागत। कर्मधारय समास– ‘विशेषण विशेष्येण बहुलम्’ अर्थात् विशेषण और विशेष्य का समानाधिकरण होने पर कर्मधारय समास होता है। जैसे – नीलोत्पलम्, कृष्ण सर्प:, पीताम्बरं, वीर पुरुष:, मुखचन्द्र:। अधिकरण तत्पुरुष समास – युद्ध प्रवीण:, वाक्पटु:, सभापण्डित:, कार्यकुशल।
C. ‘युधिष्ठिर’ अलुक् तत्पुरुष समास है। जिस समास में विभक्ति का लोप न हो अलुक् तत्पुरुष समास होता है। युधिष्ठिर का अर्थ युद्ध में स्थिर। जिस समास के पहले पद में निषेधार्थक अ या अन् शब्द का प्रयोग होता है, उसे ‘नञ समास’ कहते हैं। जैसे – अनश्व, अनुचित, अगति, अनागत। कर्मधारय समास– ‘विशेषण विशेष्येण बहुलम्’ अर्थात् विशेषण और विशेष्य का समानाधिकरण होने पर कर्मधारय समास होता है। जैसे – नीलोत्पलम्, कृष्ण सर्प:, पीताम्बरं, वीर पुरुष:, मुखचन्द्र:। अधिकरण तत्पुरुष समास – युद्ध प्रवीण:, वाक्पटु:, सभापण्डित:, कार्यकुशल।