Correct Answer:
Option B - ‘गोदान’ में आए प्रसंगों का पहले से बाद का व्यवस्थित क्रम निम्न हैं –
1. भोला का होरी को गाय देना
2. दमड़ी बंसोड़ का प्रसंग
3. रायसाहब के यहाँ धनुष यज्ञ
4. शिकार प्रसंग
5. सुन्दरिया गाय की हत्या
‘गोदान’ प्रेमचंद का उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था। इस उपन्यास में प्रगतिवाद, गांधीवाद और माक्र्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है। गोदान ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य कहा जाता है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं – होरी, धनिया, गोबर, मेहता, मालती, रायसाहब, भोला, झुनिया, सोना, रूपा, गोविंदी, हीरा, सिलिया, दातादीन, मातादीन, ओंकारनाथ, मि. खन्ना, दुलारी, सोभा आदि।
B. ‘गोदान’ में आए प्रसंगों का पहले से बाद का व्यवस्थित क्रम निम्न हैं –
1. भोला का होरी को गाय देना
2. दमड़ी बंसोड़ का प्रसंग
3. रायसाहब के यहाँ धनुष यज्ञ
4. शिकार प्रसंग
5. सुन्दरिया गाय की हत्या
‘गोदान’ प्रेमचंद का उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1936 ई. में हुआ था। इस उपन्यास में प्रगतिवाद, गांधीवाद और माक्र्सवाद (साम्यवाद) का पूर्ण परिप्रेक्ष्य में चित्रण हुआ है। गोदान ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य कहा जाता है। इस उपन्यास के प्रमुख पात्र हैं – होरी, धनिया, गोबर, मेहता, मालती, रायसाहब, भोला, झुनिया, सोना, रूपा, गोविंदी, हीरा, सिलिया, दातादीन, मातादीन, ओंकारनाथ, मि. खन्ना, दुलारी, सोभा आदि।