Explanations:
क्रोचे के अनुसार अभिव्यंजना के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं- 1. अंत:प्रज्ञा और अभिव्यंजना में अभेद है। 2. कला-सृष्टि केवल आंतरिक है। 3. कला अखंड है। 4. प्रत्येक अंत:प्रज्ञा कला है और प्रत्येक कला अन्त:प्रज्ञा है। 5. कला वस्तु में नहीं होती बल्कि वस्तु द्वारा अभिव्यक्त रूप में होती है। • क्रोचे ने सर्वप्रथम 1900 में अपना निबन्ध ‘एस्थेटिक ऐज द साइंस ऑफ एक्सप्रेशन एण्ड जनरल लिग्विस्टिक्स’ लिखा। इसी निबन्ध का विस्तृत रूप ‘ईस्थेटिक’ (1902 ई.) पुस्तक है। • क्रोचे ने सन् 1902 ई. में ‘ला क्रितीका’ पत्रिका का प्रकाशन किया। • क्रोचे ने कला निर्माण में प्रतिभा को मूल कारण माना है।