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  • A. वैयक्तिकस्तरे काठिन्यूम् अवगम्य प्रगत्यर्थम् उपायान कर्तुम्।
  • B. सुस्पष्ट-सुपाठ्य-लेखनद्वारा कथा: लेखितुम्।
  • C. व्याकरणे लिखितपरीक्षायां च उच्चांकन प्राप्तुम्।
  • D. क्रीडनप्रक्रियायां भागं स्वीकृत्य पारितोषिकान् प्राप्तुम्।
Correct Answer: Option A - व्याकरण शिक्षण में संस्कृत के शब्द एवं धातु रूप सहायक सिद्ध होते हैं। छात्रों को वाचन पत्राणि (पढ़ने वाले सामग्री रूपी पत्र) प्रयोग करने की इच्छा है। इस प्रकार के सहायक कार्य शिक्षक स्वयमत: काठिन्य निवारण को अवगत कराते हुये (छात्र विशेष को) प्रत्येक शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करता है।
A. व्याकरण शिक्षण में संस्कृत के शब्द एवं धातु रूप सहायक सिद्ध होते हैं। छात्रों को वाचन पत्राणि (पढ़ने वाले सामग्री रूपी पत्र) प्रयोग करने की इच्छा है। इस प्रकार के सहायक कार्य शिक्षक स्वयमत: काठिन्य निवारण को अवगत कराते हुये (छात्र विशेष को) प्रत्येक शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करता है।

Explanations:

व्याकरण शिक्षण में संस्कृत के शब्द एवं धातु रूप सहायक सिद्ध होते हैं। छात्रों को वाचन पत्राणि (पढ़ने वाले सामग्री रूपी पत्र) प्रयोग करने की इच्छा है। इस प्रकार के सहायक कार्य शिक्षक स्वयमत: काठिन्य निवारण को अवगत कराते हुये (छात्र विशेष को) प्रत्येक शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करता है।