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  • A. E = P + I – R – ∆S
  • B. ET = P – I – R + ∆S
  • C. ET = I – P + R – ∆S
  • D. E = P + I + R – ∆S
Correct Answer: Option A - वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा की इकाई मात्रा से कम होती है क्योंकि अधिकांश वर्षा जल भूमि में रिसकर भूमिगत जल के रूप में संचित हो जाता है। इस प्रकार वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा जल की इकाई मात्रा से काफी कम हो जाता है। वर्षा जल का अधिकांश जल भूमि पर बहता हुआ अपवाह जल के रूप में नदी नालों व सागर से एकत्रित हो जाता है। अपवाह गुणांक का मान इकाई से कम होता है। अत: वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन व सम्भावित वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन की सीमा 0 से 1 के बीच रहती है। फील्ड प्लॉट विशेष भूखंडो में एक ज्ञात समय अन्तराल में बजट के सभी तत्वों को मापा जाता है, और वाष्पीकरण उत्सर्जन को इस प्रकार निर्धारित किया जाता है- वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (ET) = (वर्षण + सिंचाई इनपुट - अपवाह - मृदा भण्डारण में वृद्धि, भूजल हानि) ET = P + I - R - ∆S
A. वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा की इकाई मात्रा से कम होती है क्योंकि अधिकांश वर्षा जल भूमि में रिसकर भूमिगत जल के रूप में संचित हो जाता है। इस प्रकार वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा जल की इकाई मात्रा से काफी कम हो जाता है। वर्षा जल का अधिकांश जल भूमि पर बहता हुआ अपवाह जल के रूप में नदी नालों व सागर से एकत्रित हो जाता है। अपवाह गुणांक का मान इकाई से कम होता है। अत: वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन व सम्भावित वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन की सीमा 0 से 1 के बीच रहती है। फील्ड प्लॉट विशेष भूखंडो में एक ज्ञात समय अन्तराल में बजट के सभी तत्वों को मापा जाता है, और वाष्पीकरण उत्सर्जन को इस प्रकार निर्धारित किया जाता है- वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (ET) = (वर्षण + सिंचाई इनपुट - अपवाह - मृदा भण्डारण में वृद्धि, भूजल हानि) ET = P + I - R - ∆S

Explanations:

वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा की इकाई मात्रा से कम होती है क्योंकि अधिकांश वर्षा जल भूमि में रिसकर भूमिगत जल के रूप में संचित हो जाता है। इस प्रकार वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन, वर्षा जल की इकाई मात्रा से काफी कम हो जाता है। वर्षा जल का अधिकांश जल भूमि पर बहता हुआ अपवाह जल के रूप में नदी नालों व सागर से एकत्रित हो जाता है। अपवाह गुणांक का मान इकाई से कम होता है। अत: वास्तविक वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन व सम्भावित वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन की सीमा 0 से 1 के बीच रहती है। फील्ड प्लॉट विशेष भूखंडो में एक ज्ञात समय अन्तराल में बजट के सभी तत्वों को मापा जाता है, और वाष्पीकरण उत्सर्जन को इस प्रकार निर्धारित किया जाता है- वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन (ET) = (वर्षण + सिंचाई इनपुट - अपवाह - मृदा भण्डारण में वृद्धि, भूजल हानि) ET = P + I - R - ∆S