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  • A. मुर्दहिया
  • B. एक कहानी यह भी
  • C. क्या भूलूँ क्या याद करूँ
  • D. आपहुदरी
Correct Answer: Option B - मन्नू भण्डारी कृत ‘एक कहानी यह भी’ (2007 ई.) को ‘जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र’ कहा गया है। यह आत्मकथात्मक कहानी है। प्रमुख पात्र– जीतमल, सुशीला, शीला अग्रवाल, डॉ. अंबालाल, मिस्टर सेठी, कोमल कोठारी, डॉ. शैल कुमारी, अर्चना वर्मा आदि। इनकी प्रमुख कृतियाँ – एक प्लेट सैलाब (1962 ई.), मैं हार गई (1957 ई.), तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है (1966 ई.), त्रिशंकु, आँखों देखा झूठ आदि। • तुलसीराम ने अपनी आत्मकथा दो भागों में लिखा है, जिसका पहला भाग – मुर्दहिया (2010 ई.) में तथा दूसरा भाग – मणिकार्णिका (2014 ई.)। • ‘मुर्दहिया’ दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आख्यान है। • हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी जो क्रमश: है – क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई.), नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.), बसेरे से दूर (1977 ई.) और दशद्वार से सोपान तक (1985 ई.)। • रमणिका गुप्ता की आत्मकथा दो भागों में है – (1) आपहुदरी, (2) हादसे (2005)
B. मन्नू भण्डारी कृत ‘एक कहानी यह भी’ (2007 ई.) को ‘जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र’ कहा गया है। यह आत्मकथात्मक कहानी है। प्रमुख पात्र– जीतमल, सुशीला, शीला अग्रवाल, डॉ. अंबालाल, मिस्टर सेठी, कोमल कोठारी, डॉ. शैल कुमारी, अर्चना वर्मा आदि। इनकी प्रमुख कृतियाँ – एक प्लेट सैलाब (1962 ई.), मैं हार गई (1957 ई.), तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है (1966 ई.), त्रिशंकु, आँखों देखा झूठ आदि। • तुलसीराम ने अपनी आत्मकथा दो भागों में लिखा है, जिसका पहला भाग – मुर्दहिया (2010 ई.) में तथा दूसरा भाग – मणिकार्णिका (2014 ई.)। • ‘मुर्दहिया’ दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आख्यान है। • हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी जो क्रमश: है – क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई.), नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.), बसेरे से दूर (1977 ई.) और दशद्वार से सोपान तक (1985 ई.)। • रमणिका गुप्ता की आत्मकथा दो भागों में है – (1) आपहुदरी, (2) हादसे (2005)

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मन्नू भण्डारी कृत ‘एक कहानी यह भी’ (2007 ई.) को ‘जिन्दगी का एक टुकड़ा मात्र’ कहा गया है। यह आत्मकथात्मक कहानी है। प्रमुख पात्र– जीतमल, सुशीला, शीला अग्रवाल, डॉ. अंबालाल, मिस्टर सेठी, कोमल कोठारी, डॉ. शैल कुमारी, अर्चना वर्मा आदि। इनकी प्रमुख कृतियाँ – एक प्लेट सैलाब (1962 ई.), मैं हार गई (1957 ई.), तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है (1966 ई.), त्रिशंकु, आँखों देखा झूठ आदि। • तुलसीराम ने अपनी आत्मकथा दो भागों में लिखा है, जिसका पहला भाग – मुर्दहिया (2010 ई.) में तथा दूसरा भाग – मणिकार्णिका (2014 ई.)। • ‘मुर्दहिया’ दलित समाज की त्रासदी और भारतीय समाज की विडंबना का सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आख्यान है। • हरिवंशराय बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार भागों में लिखी जो क्रमश: है – क्या भूलूँ क्या याद करूँ (1969 ई.), नीड़ का निर्माण फिर (1970 ई.), बसेरे से दूर (1977 ई.) और दशद्वार से सोपान तक (1985 ई.)। • रमणिका गुप्ता की आत्मकथा दो भागों में है – (1) आपहुदरी, (2) हादसे (2005)