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  • A. अनिष्ट नाश
  • B. सद्य आनन्द
  • C. लोकोपदेश
  • D. व्यवहार ज्ञान
Correct Answer: Option C - उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा आचार्य मम्मट ने ‘लोकोपदेश’ काव्य प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया है। उपर्युक्त पंक्ति द्वारा आचार्य मम्मट ने निम्नलिखित काव्य प्रयोजन की ओर संकेत किया है- यश प्राप्ति, वित्तीय लाभ, लोक व्यवहार, शिवेतर क्षतये (अमंगल का नास), सद्य: पर निर्वृति (तत्काल परमानन्द की प्राप्ति), कान्ता सम्मित उपदेश। • आचार्य मम्मट का समय 11वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया जाता है। इन्होंने ‘काव्य प्रकाश’ नामक ध्वनि विरोधी-ग्रंथ की रचना की, जिसमें 10 उल्लास (अध्याय) हैं।
C. उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा आचार्य मम्मट ने ‘लोकोपदेश’ काव्य प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया है। उपर्युक्त पंक्ति द्वारा आचार्य मम्मट ने निम्नलिखित काव्य प्रयोजन की ओर संकेत किया है- यश प्राप्ति, वित्तीय लाभ, लोक व्यवहार, शिवेतर क्षतये (अमंगल का नास), सद्य: पर निर्वृति (तत्काल परमानन्द की प्राप्ति), कान्ता सम्मित उपदेश। • आचार्य मम्मट का समय 11वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया जाता है। इन्होंने ‘काव्य प्रकाश’ नामक ध्वनि विरोधी-ग्रंथ की रचना की, जिसमें 10 उल्लास (अध्याय) हैं।

Explanations:

उपर्युक्त पंक्तियों द्वारा आचार्य मम्मट ने ‘लोकोपदेश’ काव्य प्रयोजन की ओर संकेत नहीं किया है। उपर्युक्त पंक्ति द्वारा आचार्य मम्मट ने निम्नलिखित काव्य प्रयोजन की ओर संकेत किया है- यश प्राप्ति, वित्तीय लाभ, लोक व्यवहार, शिवेतर क्षतये (अमंगल का नास), सद्य: पर निर्वृति (तत्काल परमानन्द की प्राप्ति), कान्ता सम्मित उपदेश। • आचार्य मम्मट का समय 11वीं शती का उत्तराद्र्ध स्वीकार किया जाता है। इन्होंने ‘काव्य प्रकाश’ नामक ध्वनि विरोधी-ग्रंथ की रचना की, जिसमें 10 उल्लास (अध्याय) हैं।